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पाकिस्तान के कब्जे में हैं वायुसेना के पायलट, भारत ने की जल्द से जल्द भेजने की मांग

इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने दावा किया था उनके कब्जे में भारतीय वायुसेना के दो पायलट हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी इस दावे की पुष्टि की थी

पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय पायलट विंग के एक कमांडर को गिरफ्तार करने का दावा किया। हालांकि पाकिस्तान भारतीय पायलट का कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि युद्धबंदियों पर जिनेवा संधि के नियम लागू होते हैं। पाकिस्तान को भारतीय पायलट के साथ मानवीय व्यवहार करना होगा। 


जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को किसी भी तरह से डराया-धमकाया या उनका अपमान नहीं किया जा सकता। उन्हें लेकर जनता में उत्सुकता भी पैदा नहीं की जा सकती। पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है। युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या युद्ध के बाद उन्हें लौटा दिया जाता है। जिनेवा संधि का आशय दूसरे विश्वयुद्ध के बाद 1949 में तैयार की गई संधियों और नियमों से है। इसका उद्देश्य युद्ध के समय मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना था। हालांकि कुछ देशों ने जिनेवा संधि का उल्लंघन किया है।

इस बीच, वायुसेना के पूर्व अधिकारियों ने विंग कमांडर की सकुशल वापसी की उम्मीद जताई है। पूर्व एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने कहा है कि जंग की स्थिति में यह एक कोलैटरल डैमेज है और उम्मीद है कि पाकिस्तान युद्धबंदी नियम के उल्लंघन की हिमाकत नहीं करेगा। राहा ने कहा कि हालांकि हमारा पड़ोसी देश हर समय जिनेवा संधि का पालन नहीं करता है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह इस समय कोई मूर्खता करेगा। इस समय पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर बनाए हुए है। अगर पाक कुछ भी करता है तो उसे ही परेशानी उठानी पड़ेगी।

जेनेवा संधि से जुड़ी प्रमुख बातें-

इस संधि के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जानी चाहिए। 


उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। 


संधि के तहत उन्हें खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जानी चाहिए। 


इस संधि के मुताबिक, किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता।


संधि के तहत युद्धबंदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता है।


युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता।


यह संधि किसी देश के सैनिक के पकड़े जाने पर लागू होती है। फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष।  


युद्धबंदी पर मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके अलावा युद्ध के बाद युद्धबंदी को वापस लैटाना होता है। 


कोई भी देश यद्धबंदी से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में ही पूछ सकता है।